एकादशी
कामदा एकादशी
17 अप्रैल 20274 वैशाख 1434 बंगाब्दशुक्ल पक्ष
चैत्र मास की शुक्ल एकादशी को पड़ती है। पुराणों के अनुसार गंधर्व पुष्पदूत ब्रह्मा के शाप से राक्षस बन गए थे, और देवी पार्वती की सलाह पर इस व्रत के पालन से उन्होंने अपना रूप और गंधर्वलोक पुनः प्राप्त किया — इसीलिए इसे 'कामदा' (मनोकामना पूर्ण करने वाली) कहते हैं। यह व्रत सत्कर्म और पापकर्म के फल के प्रति सजग बनने में सहायक बताया गया है।