एकादशी
जया एकादशी
17 फ़रवरी 20274 फाल्गुन 1433 बंगाब्दशुक्ल पक्ष
माघ मास की शुक्ल एकादशी को पड़ती है। पुराणों के अनुसार स्वर्ग की अप्सराएँ, जो भूलवश शापित हो गई थीं, इस व्रत के पालन से मुक्ति और स्वर्गलोक पुनः प्राप्त कर सकीं — इसीलिए इसका नाम 'जया' है। इसके पालन से अपयश, दुःस्वप्न और अशुभ फलों से मुक्ति मिलती है, ऐसी मान्यता है।