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व्रत

अक्षय तृतीया व्रत

वैशाख मास की शुक्ल तृतीया को रखा जाने वाला यह व्रत — 'अक्षय' शब्द का अर्थ है 'क्षयरहित' — इस दिन किए गए दान, तपस्या और शुभ कर्मों का फल कभी क्षीण नहीं होता, ऐसी मान्यता है। यह दिन नए कार्य (विवाह, गृहप्रवेश, नया व्यवसाय) शुरू करने के लिए भी अति शुभ माना जाता है।

नियम

सुबह स्नान करके सूर्य और विष्णु की पूजा की जाती है; दान (जल, तिल, अन्न, वस्त्र) इस दिन का मुख्य अंग है। कई लोग संकल्प करके उपवास रखते हैं और संध्या में पारण करते हैं।

लाभ

भक्तों के अनुसार इस दिन किए गए दान और शुभ कर्मों का पुण्य अक्षय रहता है और जीवन में समृद्धि व सौभाग्य लाता है।

अक्षय तृतीया व्रत — Sanatan — Sanatan