व्रत
सावित्री व्रत
महाभारत की सावित्री-सत्यवान की कथा की स्मृति में रखा जाने वाला महिलाओं का व्रत — जिसमें सावित्री ने मृत्यु से भी अपने पति को वापस ला दिया था। ज्येष्ठ मास की अमावस्या (बंगाल में) या वैशाख-ज्येष्ठ की पूर्णिमा (भारत में) विवाहित स्त्रियाँ पति की दीर्घायु और अमंगल की रोकथाम के लिए यह व्रत रखती हैं।
नियम
दिनभर उपवास रखकर सावित्री के प्रतीकों की पूजा के बाद साबुत चावल या दही-भात (बंगाल की परंपरा में) या सात प्रकार का भात, चावल, सिंदूर आदि से पारण किया जाता है; सावित्री की कथा सुनना और सुनाना भी व्रत का अंग है।
लाभ
भक्तों के अनुसार यह व्रत पति की दीर्घायु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार के कल्याण की सिद्धि करता है — सावित्री जैसे दृढ़ निष्ठा के प्रतीक के रूप में रखा जाता है।